(राग देव गन्धार)
प्रगटी राधा रूप निधान।
देखि देखि बूझत जो परस्पर नहीं त्रिभुवन में आन॥
उपमा को जेजे कहियत हैं तेहु भये निरवान।
कुम्भन दास लाल गिरधर की जोरी सहज समान॥
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (8)
आज श्री राधारानी प्रकट भइ हैं, जो रूप में सुंदरता की खान है। जो भी इनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है वह दूसरे से यही पूछ रहा है की "यह कौन हैं, जिनकी तुलना में समस्त सुंदरता भी तुच्छ हो गई है।" जो जो इनकी सुंदरता की उपमा कह रहा है वह जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति प्राप्त कर रहा है। कुंभन दास जी कह रहे हैं की "श्री राधा जू और श्री गिरधर की जोड़ी बहुत ही सहज और सुन्दरता में समान है।"
प्रगटी राधा रूप निधान।
देखि देखि बूझत जो परस्पर नहीं त्रिभुवन में आन॥
उपमा को जेजे कहियत हैं तेहु भये निरवान।
कुम्भन दास लाल गिरधर की जोरी सहज समान॥
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (8)
आज श्री राधारानी प्रकट भइ हैं, जो रूप में सुंदरता की खान है। जो भी इनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है वह दूसरे से यही पूछ रहा है की "यह कौन हैं, जिनकी तुलना में समस्त सुंदरता भी तुच्छ हो गई है।" जो जो इनकी सुंदरता की उपमा कह रहा है वह जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति प्राप्त कर रहा है। कुंभन दास जी कह रहे हैं की "श्री राधा जू और श्री गिरधर की जोड़ी बहुत ही सहज और सुन्दरता में समान है।"

