भक्तनि निंदा अति बुरी - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (21)

भक्तनि निंदा अति बुरी - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (21)

भक्तनि निंदा अति बुरी, भूलि करौ जिन कोइ।
किये सुकृत सब जनम के, छिन में डारत खोइ॥

- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (21)

भक्तों की निंदा सबसे बुरी है, और भूलकर भी उसे नहीं करनी चाहिए। उसके द्वारा अनेक जन्मों में किए हुए पुण्य एक क्षण में नष्ट हो जाते हैं।