(कवित्त)
रमा को कहा है रति रम्भा को कहा है ए,
बखानै बिधि चारौ मुख चारौ देव नौ गुनौ। [1]
सची को कहाहै सत्यभामा कौ कहाहै अरु,
चन्द कौ कहा है जामे राजत है औगुनौ॥ [2]
चंगा कौ कहा है चामीकर कौ कहा है चारु,
करके विचार निराधार हठी जो गुनो। [3]
राधे महारानी जू कौ रूप सब रुपनते,
दुगुनौ है तिगुनौ है चौगुनौ है सौगुनौ॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (95)
रमा, रति या रंभा की तुलना श्री राधा से कैसे की जा सकती है? ब्रह्मा जी अपने चारों मुखों से वर्णन कर रहे हैं कि समस्त देवियों से श्री राधा की सुंदरता नौ गुना से भी अधिक है। [1]
सची, सत्यभामा या चंद्रमा (जिसमें अवगुण भी हैं) — इनकी भी तुलना श्री राधा से नहीं की जा सकती। [2]
मूर्तिमान सौंदर्य या स्वर्ण भी उतने प्रिय नहीं हैं। श्री हठीजी अब कहते हैं - बहुत सोच-विचार के बाद भी इनमें से किसी में भी तुलनीय गुण नहीं है। [3]
सर्वोच्च महारानी श्री राधा का सौंदर्य समस्त चेतन और अचेतन वस्तुओं से न केवल दोगुना, तिगुना, या चौगुना है, बल्कि सौ गुना से भी अधिक श्रेष्ठ और अनुपम है।" [4]
रमा को कहा है रति रम्भा को कहा है ए,
बखानै बिधि चारौ मुख चारौ देव नौ गुनौ। [1]
सची को कहाहै सत्यभामा कौ कहाहै अरु,
चन्द कौ कहा है जामे राजत है औगुनौ॥ [2]
चंगा कौ कहा है चामीकर कौ कहा है चारु,
करके विचार निराधार हठी जो गुनो। [3]
राधे महारानी जू कौ रूप सब रुपनते,
दुगुनौ है तिगुनौ है चौगुनौ है सौगुनौ॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (95)
रमा, रति या रंभा की तुलना श्री राधा से कैसे की जा सकती है? ब्रह्मा जी अपने चारों मुखों से वर्णन कर रहे हैं कि समस्त देवियों से श्री राधा की सुंदरता नौ गुना से भी अधिक है। [1]
सची, सत्यभामा या चंद्रमा (जिसमें अवगुण भी हैं) — इनकी भी तुलना श्री राधा से नहीं की जा सकती। [2]
मूर्तिमान सौंदर्य या स्वर्ण भी उतने प्रिय नहीं हैं। श्री हठीजी अब कहते हैं - बहुत सोच-विचार के बाद भी इनमें से किसी में भी तुलनीय गुण नहीं है। [3]
सर्वोच्च महारानी श्री राधा का सौंदर्य समस्त चेतन और अचेतन वस्तुओं से न केवल दोगुना, तिगुना, या चौगुना है, बल्कि सौ गुना से भी अधिक श्रेष्ठ और अनुपम है।" [4]

