मिली है अंगधार ह्वै - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (74)

मिली है अंगधार ह्वै - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (74)

मिली है अंगधार ह्वै, श्री बन बीथिन धूर।
परिहैं पद पंकज जुगल, मेरी जीवन मूर॥

- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (74)

जिस श्री वृन्दावन की रज में श्री युगल-किशोर के विचरण से उनके चरण-कमलों के पदचिह्न अंकित हुए हों, उस वन की रज में लोटने का सौभाग्य मुझे कब प्राप्त होगा?