(सवैया)
चन्द सो आनन कंचन सो तन, हौं लखीकैं बिनमोल बिकानी। [1]
औ अरविन्द सो आँखिन कों 'हठी', देखत मेरी यै आँखी सिरानी॥ [2]
राजति हैं मनमोहन के संग, वारौं मैं कोटि रमारति रानी। [3]
जीवन मूरी सबैं ब्रज को, ठकुरानी हमारी है राधिका रानी॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (82)
श्री राधा के मुख-कमल की आभा चंद्र के समान है और उनके अंग का वर्ण स्वर्ण के समान है, जिनके दर्शन मात्र से मैं बिना किसी मोल के बिक गया हूँ। [1]
जब मैं उनके नेत्र-कमलों की ओर दृष्टि करता हूँ, तो मेरे नेत्र रसासक्त होकर पलक झपकाना भूल जाते हैं। [2]
जब श्री राधा मनमोहन के संग विराजती हैं, तो इस छवि पर मैं करोड़ों लक्ष्मियों और रतियों को भी वार दूँ। [3]
श्री राधा ठकुरानी समस्त ब्रजमंडल के निवासियों के लिए जीवन-प्राण और संजीवनी हैं, और वे ही मेरी महारानी हैं। [4]
चन्द सो आनन कंचन सो तन, हौं लखीकैं बिनमोल बिकानी। [1]
औ अरविन्द सो आँखिन कों 'हठी', देखत मेरी यै आँखी सिरानी॥ [2]
राजति हैं मनमोहन के संग, वारौं मैं कोटि रमारति रानी। [3]
जीवन मूरी सबैं ब्रज को, ठकुरानी हमारी है राधिका रानी॥ [4]
- श्री हठी जी, राधा सुधा शतक (82)
श्री राधा के मुख-कमल की आभा चंद्र के समान है और उनके अंग का वर्ण स्वर्ण के समान है, जिनके दर्शन मात्र से मैं बिना किसी मोल के बिक गया हूँ। [1]
जब मैं उनके नेत्र-कमलों की ओर दृष्टि करता हूँ, तो मेरे नेत्र रसासक्त होकर पलक झपकाना भूल जाते हैं। [2]
जब श्री राधा मनमोहन के संग विराजती हैं, तो इस छवि पर मैं करोड़ों लक्ष्मियों और रतियों को भी वार दूँ। [3]
श्री राधा ठकुरानी समस्त ब्रजमंडल के निवासियों के लिए जीवन-प्राण और संजीवनी हैं, और वे ही मेरी महारानी हैं। [4]

