कृपयति यदि राधा बाधिता - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतु:श्लोकी (1)

कृपयति यदि राधा बाधिता - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतु:श्लोकी (1)

कृपयति यदि राधा बाधिता शेष बाधा किम परम विशिष्टं पुष्टिमर्यादयोर्मे।
यदि वदति च किंञ्चित स्मेर हासोऽदित श्री द्विज वर मणि पंक्त्या भुक्ति शुक्त्या तदा किम्॥

- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतु:श्लोकी (1)

यदि समस्त बाधाओं को दूर करने वाली श्री राधा रानी कृपा कर दें, तो जीव के लिए ऐसी कौन सी श्रेष्ठ मर्यादा शेष रह जाती है तीनों लोकों में, जो ह्रदय में प्रकट ना हो। यदि श्री राधा ने मुस्कुराकर कुछ कह दिया तो इसके समक्ष तीनों लोकों का वैभव या मुक्ति भी पा लिया, तो क्या पाया।