(राग सारंग)
साँची प्रीति भई इक ठौर।
मृगनयनी कमल दल लोचन, लाल श्याम राधा तन गौर॥
इत सिर सोहत पाट की डोरी, हरि सिर रुचिर चन्द्रिका मोर।
यह रसिकनी वे रसिक शिरोमणि, यह ग्वालिन वे माखन चोर॥
यह करनी वे गजवर नायक, यह मालिनी वे भोगी भोंर।
परमानन्द नन्द नन्दन की, राधासी प्यारी नहीं और॥
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (794)
सच्चा और निश्छल प्रेम आज एक स्थान पर उपस्थित हो गए हैं। वह मृगनयनी श्री राधा और कमल दल के समान नेत्र वाले श्री श्याम सुंदर हैं जो गौर एवं श्याम वर्ण के हैं। श्री राधा के सिर पर रेशमी चन्द्रिका शोभा पा रहा है एवं श्री श्याम सुंदर के सिर पर मोर मुकुट अति रुचिकर प्रतीत हो रहा है। श्री राधा रसिकनी हैं एवं श्री श्यामसुंदर रसिक शिरोमणि हैं, श्री राधा ग्वालिनी हैं एवं श्री श्यामसुंदर माखन चोर है। श्री राधा हाथियों में महारानी हैं एवं श्री श्याम सुंदर महाराजा हैं। श्री राधा फूलों के बगीचों की मालिनी हैं एवं श्री श्यामसुंदर उस बगीचे के भ्रमर हैं। श्री परमानन्द दास कर रहे हैं "नन्दनन्दन श्री श्याम सुंदर की प्राण प्यारी श्री राधा जू से प्यारी और कोई नहीं है।"
साँची प्रीति भई इक ठौर।
मृगनयनी कमल दल लोचन, लाल श्याम राधा तन गौर॥
इत सिर सोहत पाट की डोरी, हरि सिर रुचिर चन्द्रिका मोर।
यह रसिकनी वे रसिक शिरोमणि, यह ग्वालिन वे माखन चोर॥
यह करनी वे गजवर नायक, यह मालिनी वे भोगी भोंर।
परमानन्द नन्द नन्दन की, राधासी प्यारी नहीं और॥
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (794)
सच्चा और निश्छल प्रेम आज एक स्थान पर उपस्थित हो गए हैं। वह मृगनयनी श्री राधा और कमल दल के समान नेत्र वाले श्री श्याम सुंदर हैं जो गौर एवं श्याम वर्ण के हैं। श्री राधा के सिर पर रेशमी चन्द्रिका शोभा पा रहा है एवं श्री श्याम सुंदर के सिर पर मोर मुकुट अति रुचिकर प्रतीत हो रहा है। श्री राधा रसिकनी हैं एवं श्री श्यामसुंदर रसिक शिरोमणि हैं, श्री राधा ग्वालिनी हैं एवं श्री श्यामसुंदर माखन चोर है। श्री राधा हाथियों में महारानी हैं एवं श्री श्याम सुंदर महाराजा हैं। श्री राधा फूलों के बगीचों की मालिनी हैं एवं श्री श्यामसुंदर उस बगीचे के भ्रमर हैं। श्री परमानन्द दास कर रहे हैं "नन्दनन्दन श्री श्याम सुंदर की प्राण प्यारी श्री राधा जू से प्यारी और कोई नहीं है।"

