तत्रस्थं युगलं ध्वात्वा पुनरागमनं नहि। - सनत्कुमार संहिता श्री वृन्दावन विहारी-विहारिणी का ध्यान करने वाले साधक का फिर संसार में गमना गमन नही होता।