रे मन क्यों भटकत फिरत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (26)

रे मन क्यों भटकत फिरत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (26)

रे मन क्यों भटकत फिरत, भज श्री नन्दकुमार।
नारायण अबहूँ समझ, भयो न कछु बिगार॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (26)

अरे मन, अनंत कोटि जन्मों से तू क्यों भटक रहा है? अब श्रीकृष्ण का भजन कर। श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है; इस बात को समझ और शरणागत हो जा।