इत बौना अकाश फल - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (100)

इत बौना अकाश फल - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (100)

इत बौना अकाश फल, चाहत है मन मांहि।
ताकौ एक कृपा बिना, और जतन कछु नाहिं॥

- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (100)

बौना आदमी यदि आकाश-फल को (वृन्दावन को) प्राप्त करना चाहे तो एक मात्र कृपा के बिना इसका अन्य कोई उपाय नहीं।