(राग गौरी)
हमारो महल सदा सुखदाई।
प्रिया लाल कों रंग बढ़ावत छिन छिन प्रीति सवाई॥
छलकत छींट परी आनंद की ब्रज में नाँहि समाई।
यह गुप्त रीति हरिदास प्रकट करि रसिकन के मन भाई॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (39)
हमारा निजमहल (श्री राधा का निकुंज महल) नित्य ही सुख बरसाने वाला है। युगल के रंग को सदा काल यह महल ऐसा बड़ा रहा है कि इनकी प्रीती नित्य नित्य बढ़ती ही जा रही है। इस अद्भुत निज महल के रस की एक छींट (बूँद) भी ब्रज में कहीं नहीं समाई (अर्थात यह वृन्दावन निज महल का रस वृन्दावन को छोड़कर, ब्रज में भी कहीं नहीं है)। इस अत्यंत गुप्त एवं गोपनीय रस को ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी ने प्रकट किया है जो समस्त रसिक जनों के मन को भाता है।
हमारो महल सदा सुखदाई।
प्रिया लाल कों रंग बढ़ावत छिन छिन प्रीति सवाई॥
छलकत छींट परी आनंद की ब्रज में नाँहि समाई।
यह गुप्त रीति हरिदास प्रकट करि रसिकन के मन भाई॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (39)
हमारा निजमहल (श्री राधा का निकुंज महल) नित्य ही सुख बरसाने वाला है। युगल के रंग को सदा काल यह महल ऐसा बड़ा रहा है कि इनकी प्रीती नित्य नित्य बढ़ती ही जा रही है। इस अद्भुत निज महल के रस की एक छींट (बूँद) भी ब्रज में कहीं नहीं समाई (अर्थात यह वृन्दावन निज महल का रस वृन्दावन को छोड़कर, ब्रज में भी कहीं नहीं है)। इस अत्यंत गुप्त एवं गोपनीय रस को ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी ने प्रकट किया है जो समस्त रसिक जनों के मन को भाता है।

