सरन गहौ श्री हरिदास की - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (260)

सरन गहौ श्री हरिदास की - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (260)

सरन गहौ श्री हरिदास की, माया छुए न छाँह।
कुंजबिहारिनि लाड़िली, बेगि गहेंगी बाँह॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (260)

श्री हरि की माया उन लोगों को छू भी नहीं सकती, जो श्री हरिदास (ललिता-अवतार) के चरण-कमलों की शरण ग्रहण कर लेते हैं। ऐसा इसलिए है कि श्री कुंजबिहारिणी लाड़िली श्री राधा स्वयं उनकी भुजाएँ पकड़कर उन्हें सुरक्षित रखती हैं।