"चाकर रहसूं बाग़ लगासूं, नित उठ दरसन पासूं
ब्रिन्दाबन की कुञ्ज गलिन में, तेरी लीला गासूं"
- मीराबाई
हे कृष्ण, मैं सदा आपकी दासी रहूँगी और आपके लिए एक बाग लगाउँगी। प्रतिदिन सुबह उठ कर आपका दर्शन करुँगी। वृंदावन की कुञ्ज गलियों में विचरण कर, मैं आपके दिव्य लीलाओं को गाऊँगी।
ब्रिन्दाबन की कुञ्ज गलिन में, तेरी लीला गासूं"
- मीराबाई
हे कृष्ण, मैं सदा आपकी दासी रहूँगी और आपके लिए एक बाग लगाउँगी। प्रतिदिन सुबह उठ कर आपका दर्शन करुँगी। वृंदावन की कुञ्ज गलियों में विचरण कर, मैं आपके दिव्य लीलाओं को गाऊँगी।

