पोथी पढ़ि पंडित हुआ, कै मौलवी कुरान।
जु पै प्रेम जान्यो नहीं, कियौ कहा रसखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (13)
पोथी पढ़-पढ़ कर कोई पंडित बन जाए या कोई मौलवी कुरान पढ़कर ज्ञान बाँटे, परंतु प्रेम-रस में डूबे बिना सब व्यर्थ है; कहीं कोई गति नहीं।
जु पै प्रेम जान्यो नहीं, कियौ कहा रसखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (13)
पोथी पढ़-पढ़ कर कोई पंडित बन जाए या कोई मौलवी कुरान पढ़कर ज्ञान बाँटे, परंतु प्रेम-रस में डूबे बिना सब व्यर्थ है; कहीं कोई गति नहीं।

