लखी न जिन छबि श्याम की, कियो न पलभर ध्यान।
नारायण ते जगत में, प्रगट निपट पाषाण॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (73)
जिसने पलभर के लिए भी श्यामसुन्दर की छवि का दर्शन नहीं किया और न ही क्षणभर उनका ध्यान किया, वह तो इस जगत में प्रकट हृदयहीन पत्थर के समान है।
नारायण ते जगत में, प्रगट निपट पाषाण॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (73)
जिसने पलभर के लिए भी श्यामसुन्दर की छवि का दर्शन नहीं किया और न ही क्षणभर उनका ध्यान किया, वह तो इस जगत में प्रकट हृदयहीन पत्थर के समान है।

