तजि कुतर्क जो नित सुनै - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहिन लीला (18)

तजि कुतर्क जो नित सुनै - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहिन लीला (18)

तजि कुतर्क जो नित सुनै, यह लीला रसपुञ्ज।
नारायण ताकूं युगल, वास देत निज कुंज॥

- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहिन लीला (18)

श्री नारायण स्वामी कहते हैं— ‘श्री युगल सरकार अपने निज-महल का निवास उन्हीं को प्रदान करते हैं, जो समस्त प्रकार के तर्क–कुतर्क का त्याग कर सदैव युगल-लीलाओं का श्रवण करते रहते हैं।’