बलि-बलि श्रीराधे-नँदनँदना। [1]
मेरे मनकी अमित अघटनी को जानै तुम बिना॥ [2]
भलेई चारु चरन दरसाये ढूँढ़त फिरिहौं बृंदाबना। [3]
जै श्रीभट्ट स्यामा स्यामरूप पै निवछावर तन-मना॥ [4]
- श्रीभट्ट देवाचार्य
हे श्री श्यामा श्याम, आपकी सदा जय हो। [1]
आपके सिवा मेरे ह्रदय की अघटित घटना कौन जाने। [2]
मैं आपके चरण कमलों के दर्शन की लालसा हृदय में लिए वृंदावन में विचरण कर रहा हूँ। [3]
श्रीभट्ट देवाचार्य कह रहे हैं "श्री श्यामा श्याम की अति सुंदर रूप माधुरी पर मैं अपने तन और मन को न्योछावर करता हूँ।" [4]
मेरे मनकी अमित अघटनी को जानै तुम बिना॥ [2]
भलेई चारु चरन दरसाये ढूँढ़त फिरिहौं बृंदाबना। [3]
जै श्रीभट्ट स्यामा स्यामरूप पै निवछावर तन-मना॥ [4]
- श्रीभट्ट देवाचार्य
हे श्री श्यामा श्याम, आपकी सदा जय हो। [1]
आपके सिवा मेरे ह्रदय की अघटित घटना कौन जाने। [2]
मैं आपके चरण कमलों के दर्शन की लालसा हृदय में लिए वृंदावन में विचरण कर रहा हूँ। [3]
श्रीभट्ट देवाचार्य कह रहे हैं "श्री श्यामा श्याम की अति सुंदर रूप माधुरी पर मैं अपने तन और मन को न्योछावर करता हूँ।" [4]

