महारानी श्री राधिका, अष्ट सखियन के झुंड।
डगर बुहारत साँवरौ, जय जय राधा कुंड॥
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी
जहाँ-जहाँ महारानी श्री राधारानी और उनकी अष्ट-सखियाँ चरण रखती हैं, वहाँ श्रीकृष्ण पहले उस भूमि को बुहारते (झाड़ू लगाते) हैं। ऐसी पावन भूमि—श्री राधाकुण्ड—की जय हो, जय हो।

