मेरी भववाधा हरौ - श्रीमहाकवी श्री बिहारी, मंगलाचरण

मेरी भववाधा हरौ - श्रीमहाकवी श्री बिहारी, मंगलाचरण

मेरी भववाधा हरौ, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होय॥

- श्रीमहाकवी श्री बिहारी लाल, मंगलाचरण, बिहारी सतसई (1)

हे श्री राधे! मेरी भव-बाधा को केवल आप ही हर सकती हैं, कृपा करके इसे दूर कीजिए। आपकी महिमा में मैं इतना ही कहूँ कि जब आपके तन की छाया भी श्रीकृष्ण पर पड़ती है, तो वे हरित (अत्यन्त प्रसन्न) हो उठते हैं।