अपनी अपनी वस्तु सों - श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शीख नख वर्णन (02)

अपनी अपनी वस्तु सों - श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शीख नख वर्णन (02)

अपनी अपनी वस्तु सों, करै सकल बिवहार।
रसिक अनन्यन धन्य ही, श्रीवृषभान कुमारि॥

- श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शीख नख वर्णन (02)

संसार में सभी लोग अपनी-अपनी प्रिय वस्तुओं और सांसारिक संबंधों के सहारे ही समस्त व्यवहार और जीवन निर्वाह करते हैं। किंतु उन अनन्य रसिक भक्तों का जीवन धन्य है, जिनके लिए एकमात्र श्री वृषभानु-नन्दिनी (श्री राधा) ही उनका सर्वस्व धन एवं परम आधार हैं।