श्रीकुंजबिहारी सर्वसु सार - श्री बिहारिनदेव जी

श्रीकुंजबिहारी सर्वसु सार - श्री बिहारिनदेव जी

श्रीकुंजबिहारी सर्वसु सार।
श्रीस्वामी हरिदास उद्धरे रसिक अनन्यनि कौ आधार। [1]
नित्य प्रकट गावत नहिं पावत सब श्रुति तत्व विचार।
इहि निजु नाम, धाम, वृन्दावन निर्णय नित्यबिहार। [2]

- श्री बिहारिनदेव जी

श्री बिहारिनदासजी ने स्वामी हरिदास जी की रस रीति की विशेषताएँ बताते हुए लिखा है कि इसमें सर्वस्व सार कुंजबिहारी ही हैं और रसिक अनन्यों की रस रीति का उद्धार श्रीस्वामी हरिदास जी ने ही किया है। [1]
स्वामी हरिदासजी जिस नित्यबिहार का प्रकट रूप से गान करते हैं, उसे तो श्रुतियों के तत्व विचार से भी नहीं पाया जा सकता। इसका अपना नाम धाम वृन्दावन है, निर्णयपूर्वक यह नित्यतत्व नित्यबिहार ही है। [2]