श्रीहरिवंश सु रीति सुनाऊँ, श्यामा-श्याम एक सँग गाऊँ। [1]
छिन इक कबहुँ न अन्तर होई, प्रान सु एक देह हैं दोई॥ [2]
राधा संग बिना नहीं श्याम, श्याम बिना नहिं राधा नाम। [3]
छिन-छिन प्रति आराधत रहहीं, राधा नाम श्याम तब कहहीं॥ [4]
ललितादिकनि संग सचु पावैं, श्रीहरिवंश सुरत-रति गावैं॥ [5]
- श्री दामोदरदास (सेवक जी), श्री सेवक वाणी (4.7)
श्री सेवक जी कहते हैं "अब मैं श्री हरिवंश की रसोपासना की सुन्दर परिपाटी सुनाता हूँ जिसमें श्यामाश्याम का एक साथ गान किया जाता है। [1]
इन दोनों में एक क्षण का भी अन्तर नहीं होता। इन दोनों के प्राण तो एक हैं और देह दो हैं। [2]
श्री राधा के संग के बिना कभी भी श्यामसुन्दर नहीं रहते और श्यामसुन्दर के बिना श्री राधा नाम नहीं लिया जाता क्योंकि श्री राधा नाम का उच्चारण श्री श्यामसुन्दर तभी करते हैं, जब वे क्षण-क्षण में इस नाम का आराधन करते रहते हैं। [3 & 4]
ये श्री राधा श्यामसुन्दर ललितादिक सहचरियों के साथ में सुख पाते हैं अर्थात् ललितादिक सहचरियों के सहयोग से इन दोनों की परस्पर प्रेम लीला में सुख की वृद्धि होती है और श्री हरिवंश सहचरि रूप से इनकी लीला में सम्मिलित होकर इनकी सूरत रति (श्रृंगार रसमयी प्रेम रति) का गान करते हैं।" [5]
छिन इक कबहुँ न अन्तर होई, प्रान सु एक देह हैं दोई॥ [2]
राधा संग बिना नहीं श्याम, श्याम बिना नहिं राधा नाम। [3]
छिन-छिन प्रति आराधत रहहीं, राधा नाम श्याम तब कहहीं॥ [4]
ललितादिकनि संग सचु पावैं, श्रीहरिवंश सुरत-रति गावैं॥ [5]
- श्री दामोदरदास (सेवक जी), श्री सेवक वाणी (4.7)
श्री सेवक जी कहते हैं "अब मैं श्री हरिवंश की रसोपासना की सुन्दर परिपाटी सुनाता हूँ जिसमें श्यामाश्याम का एक साथ गान किया जाता है। [1]
इन दोनों में एक क्षण का भी अन्तर नहीं होता। इन दोनों के प्राण तो एक हैं और देह दो हैं। [2]
श्री राधा के संग के बिना कभी भी श्यामसुन्दर नहीं रहते और श्यामसुन्दर के बिना श्री राधा नाम नहीं लिया जाता क्योंकि श्री राधा नाम का उच्चारण श्री श्यामसुन्दर तभी करते हैं, जब वे क्षण-क्षण में इस नाम का आराधन करते रहते हैं। [3 & 4]
ये श्री राधा श्यामसुन्दर ललितादिक सहचरियों के साथ में सुख पाते हैं अर्थात् ललितादिक सहचरियों के सहयोग से इन दोनों की परस्पर प्रेम लीला में सुख की वृद्धि होती है और श्री हरिवंश सहचरि रूप से इनकी लीला में सम्मिलित होकर इनकी सूरत रति (श्रृंगार रसमयी प्रेम रति) का गान करते हैं।" [5]

