गोरी मन भोरी अहो - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (1)

गोरी मन भोरी अहो - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (1)

गोरी मन भोरी अहो, श्रीराधे सुख रास।
चरन कमल बंदन करौं, पुजवौ जन की आस॥

- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (1)

हे गौरांगी श्री राधे! हे कोमल-हृदया, समस्त आनन्द की मूल स्वरूपिणी! मैं आपके चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ; कृपा कर मुझे अपनी निष्काम सेवा प्रदान कर मेरे चित्त की अभिलाषा को पूर्ण कीजिए।