पुण्य पाठ पूजा, प्रगट, करत सहित हंकार।
नारायण रीझै नहीं, चतुरन को सरदार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (44)
यदि अहंकार सहित पुण्य, पूजा, पाठ या कोई भी साधन किया जाए, तो ठाकुर जी उससे प्रसन्न नहीं होते। वे चतुर-शिरोमणि हैं—उन्हें छल या आडम्बर से मूर्ख नहीं बनाया जा सकता।
नारायण रीझै नहीं, चतुरन को सरदार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (44)
यदि अहंकार सहित पुण्य, पूजा, पाठ या कोई भी साधन किया जाए, तो ठाकुर जी उससे प्रसन्न नहीं होते। वे चतुर-शिरोमणि हैं—उन्हें छल या आडम्बर से मूर्ख नहीं बनाया जा सकता।

