वृन्दावन को चिन्तवन, यहै दीप उर बार।
कोटि जन्म के तम अघहि, काटि करै उजियार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (106)
यदि हृदय में श्री वृन्दावन का चिन्तन-रूपी दीपक सदा प्रकाशित रहे, तो वह करोड़ों जन्मों के पाप-रूपी अन्धकार को नष्ट कर सर्वत्र प्रकाश फैला देता है।
कोटि जन्म के तम अघहि, काटि करै उजियार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (106)
यदि हृदय में श्री वृन्दावन का चिन्तन-रूपी दीपक सदा प्रकाशित रहे, तो वह करोड़ों जन्मों के पाप-रूपी अन्धकार को नष्ट कर सर्वत्र प्रकाश फैला देता है।

