ब्रजराज से नाता जुड़ा अब है, तब जग की क्या परवाह करें।
बस याद में रोते रहें उनकी, पलकों पर अश्र प्रवाह करें॥
- ब्रज के सेवैया
जब ब्रजराज श्री कृष्ण से नाता जोड़ ही लिया है तो शेष जग की चिंता क्यों करें। अब तो बस उनकी याद में रोती रहूँ और उनकी ही याद में मेरे पलकें सदा भीगी रहें।
बस याद में रोते रहें उनकी, पलकों पर अश्र प्रवाह करें॥
- ब्रज के सेवैया
जब ब्रजराज श्री कृष्ण से नाता जोड़ ही लिया है तो शेष जग की चिंता क्यों करें। अब तो बस उनकी याद में रोती रहूँ और उनकी ही याद में मेरे पलकें सदा भीगी रहें।

