जय नंदनंदन सुख धाम हरे - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी

जय नंदनंदन सुख धाम हरे - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी

जय नंदनंदन सुख धाम हरे, गोपी जन वल्लभ श्याम हरे।
अनंत आनंद के धाम नंद के पुत्र की जय हो।  गोपिजनों के प्रिय श्री कृष्ण की जय हो।

जय जीवन धन ब्रज बाम हरे, संग मनसुख अरु श्रीदाम हरे।
श्री कृष्ण की जय हो, जो गोपियों के जीवनधन हैं। श्री कृष्ण की जय हो जो अपने प्रिय मित्र मनसुखा और श्रीदामा के साथ वन विहार करते हैं।

जय कोटि काम अभिराम हरे, रस बरसावत ब्रज धाम हरे।
श्रीकृष्ण की जय हो, जिनकी शोभा कोटि कामदेवों को लज्जित कर रही है। ब्रज में अविरल प्रेम रस की वर्षा करने वाले श्रीकृष्ण की जय हो।

जय सुषमा सींव ललाम हरे, विधी हरि हर वंदित पाम हरे।
श्री कृष्ण की जय, जो सौंदर्य की सीमा है। श्री कृष्ण की जय हो, जिनके चरण कमलों को ब्रह्मा, विष्णु और शंकर भी पूजते हैं।

जय नंद यशोमति बाम हरे, चेरे "कृपालु" बिनु दाम हरे।
नन्द, यशोदा और ब्रज गोपियों की जय हो। श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं, "मैं उनका एक बिन मोल बिका हुआ दास हूँ।"
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी