इदं वृन्दावनं रम्यं - बृहद-गौतमीय तंत्र

इदं वृन्दावनं रम्यं - बृहद-गौतमीय तंत्र

‘इदं वृन्दावनं रम्यं मम धामैव केवलम्
अत्र मे पभावः पक्षिमृगाः कीटाः नरामराः
पंचयोजनमेवास्ति वनं मे देहरूपकम्’

- बृहद-गौतमीय तंत्र

श्री कृष्ण कहते हैं कि "यह सुंदर वृंदावन मेरा नित्य निवास धाम है। पशु, पक्षी, वृक्ष, कीट, मनुष्य, और मेरे साथ यहाँ रहने वाले मृग मरीचिका सभी मृत्यु के पश्चात् मेरे नित्य धाम में ही रहेंगे।"