श्रीवृषभानु - कुमारि जू, विनय करौं सुनि कान।
देहु निरन्तर आपने, चरन कमल कौ ध्यान॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (13)
हे वृषभानु-दुलारी श्री राधा-जू! कृपा करके मेरी प्रार्थना को सुनें—मुझे ऐसा वरदान दें कि मेरा मन निरन्तर आपके चरण-कमलों का स्मरण करता रहे।
देहु निरन्तर आपने, चरन कमल कौ ध्यान॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (13)
हे वृषभानु-दुलारी श्री राधा-जू! कृपा करके मेरी प्रार्थना को सुनें—मुझे ऐसा वरदान दें कि मेरा मन निरन्तर आपके चरण-कमलों का स्मरण करता रहे।

