करै वरत एकादशी, महाप्रसाद तें दुरी।
बाँधे जमपुर जाँइगें, मुख में परिहै धुरि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (134)
श्री हरिराम व्यास जी ‘महाप्रसाद’ के महत्व का वर्णन करते हुए कहते हैं— ‘जो एकादशी के दिन महाप्रसाद—अर्थात् श्री राधा–कृष्ण के प्रसाद—में चिदानन्द का भाव न देखकर उसे साधारण अन्न समझता है और उसका त्याग करता है, उसे यमदूत बाँधकर यमपुर ले जाते हैं और वहाँ उसके मुख में मिट्टी भर दी जाती है।’
बाँधे जमपुर जाँइगें, मुख में परिहै धुरि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (134)
श्री हरिराम व्यास जी ‘महाप्रसाद’ के महत्व का वर्णन करते हुए कहते हैं— ‘जो एकादशी के दिन महाप्रसाद—अर्थात् श्री राधा–कृष्ण के प्रसाद—में चिदानन्द का भाव न देखकर उसे साधारण अन्न समझता है और उसका त्याग करता है, उसे यमदूत बाँधकर यमपुर ले जाते हैं और वहाँ उसके मुख में मिट्टी भर दी जाती है।’

