चार दिनन की चांदनी - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (29)

चार दिनन की चांदनी - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (29)

चार दिनन की चांदनी, यह संपति संसार।
नारायण हरि भजन करि, जासों होय उबार॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (29)

इस मानव जीवन-संसार की चाँदनी तो केवल चार दिनों की है, जिसके पश्चात अन्धकार ही अन्धकार है। इसलिए हे मन! तू हरि का भजन कर, जिससे तू इस दुःखमय संसार से पार हो सके।