जिनके दरशन हेतु नित - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (5.3)

जिनके दरशन हेतु नित - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (5.3)

जिनके दरशन हेतु नित, बिकल रहत घनश्याम।
तिन चरनन मैं बसै मन, मेरौ आठौं जाम॥

- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (5.3)

जिनकी एक झलक पाने के लिए घनश्याम-वर्ण श्री श्यामसुन्दर भी नित्य व्याकुल रहते हैं, ऐसी श्री स्वामिनी-जू के श्रीचरणों के नित्य स्मरण में मेरा मन सदा निमग्न रहे।