(राग सारंग)
बनी श्रीराधा मोहन की जोरी।
इंद्रनील-मनि स्याम मनोहर, सात कुंभ-तनु गोरी॥ [1]
भाल बिसाल तिलक हरि, कामिनि चिकुर-चंद्र बिच रोरी।
गज-नाइक प्रभु चाल, गयंदनि-गति वृषभानु किसोरी॥ [2]
नील-निचोल जुवति, मोहन पट-पीत अरुन सिर खोरी ।
जै श्रीहित हरिवंश रसिक राधा पति, सुरत-रंग में बोरी॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (9)
अति अनुपम जोड़ी है श्रीराधा मोहन की। मनोहर श्याम सुन्दर इन्द्र नील मणि की भाँति हैं। तो वृषभानु किशोरी श्रीराधा काञ्चन तनु हैं। [1]
लाल के विशाल भाल पर तिलक शोभित है, तो कामिनि प्रिया की केश चन्द्रिका के मध्य (माँग) में रोरी लसित है। मोहन लाल की गति (चाल) मत्त गजराज जैसी मोहक और श्रीवृषभानु नन्दिनी की मत्त करिणी जैसी मद मंथर है। [2]
नव तरुणि श्रीराधा के श्रीअंग में नीलाम्बर शोभित है और श्याम सुन्दर के श्यामाङ्ग पर पीत कौशेय धारण है। उपरोक्त नख शिख श्रृंगार की पूर्णता शिरोभाग पर लसित अरुण खोरी (छोर) कर रहा है। श्रीहित हरिवंश कहते हैं यह जोड़ी सौन्दर्य एवं रस की सीमा है। राधापति श्रीकृष्ण रसिक चूड़ामणि हैं और श्रीराधा सुरत रस सिन्धु रूपा हैं। [3]
बनी श्रीराधा मोहन की जोरी।
इंद्रनील-मनि स्याम मनोहर, सात कुंभ-तनु गोरी॥ [1]
भाल बिसाल तिलक हरि, कामिनि चिकुर-चंद्र बिच रोरी।
गज-नाइक प्रभु चाल, गयंदनि-गति वृषभानु किसोरी॥ [2]
नील-निचोल जुवति, मोहन पट-पीत अरुन सिर खोरी ।
जै श्रीहित हरिवंश रसिक राधा पति, सुरत-रंग में बोरी॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (9)
अति अनुपम जोड़ी है श्रीराधा मोहन की। मनोहर श्याम सुन्दर इन्द्र नील मणि की भाँति हैं। तो वृषभानु किशोरी श्रीराधा काञ्चन तनु हैं। [1]
लाल के विशाल भाल पर तिलक शोभित है, तो कामिनि प्रिया की केश चन्द्रिका के मध्य (माँग) में रोरी लसित है। मोहन लाल की गति (चाल) मत्त गजराज जैसी मोहक और श्रीवृषभानु नन्दिनी की मत्त करिणी जैसी मद मंथर है। [2]
नव तरुणि श्रीराधा के श्रीअंग में नीलाम्बर शोभित है और श्याम सुन्दर के श्यामाङ्ग पर पीत कौशेय धारण है। उपरोक्त नख शिख श्रृंगार की पूर्णता शिरोभाग पर लसित अरुण खोरी (छोर) कर रहा है। श्रीहित हरिवंश कहते हैं यह जोड़ी सौन्दर्य एवं रस की सीमा है। राधापति श्रीकृष्ण रसिक चूड़ामणि हैं और श्रीराधा सुरत रस सिन्धु रूपा हैं। [3]

