ब्रह्मादिक के भोग सुख - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (169)

ब्रह्मादिक के भोग सुख - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (169)

ब्रह्मादिक के भोग सुख, विष सम लागत ताहि।
नारायण ब्रजचन्दकी, लगन लगी है जाहि॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (169)

जिसे ब्रजचन्द्र (श्री राधा–कृष्ण) की सच्ची लगन लग जाती है, उसे ब्रह्मा आदि देव के ऐश्वर्य और स्वर्ग के समस्त भोग-विलास भी विष के समान कड़वे और त्याज्य लगने लगते हैं।