गरियो मौलीनामहमहह तेषां चरणयोः कृतः स्वात्मन्यासः सुसुखमिदमायुः क्षपयिता।
अहो येषां राधाप्रियं रसमयं दिव्यं चरितामृत स्रोतो वृन्दावनमिदमहो मामनयत॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (12.55)
अहो! जिन श्रीराधा प्रिय रसमय दिव्य चरितामृत स्रोत मुझे इस श्रीवृन्दावन में ले आया है, उन महापुरुषों में भी शिरोमणि जो रसिक महापुरुष हैं उन राधा प्रिय जनों के चरण युगल में मैं आत्म-समर्पण करते हुए एवं यहाँ श्रीवृन्दावन में ही सुख सहित मैं अपनी समस्त आयु बिताऊंगा।
अहो येषां राधाप्रियं रसमयं दिव्यं चरितामृत स्रोतो वृन्दावनमिदमहो मामनयत॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (12.55)
अहो! जिन श्रीराधा प्रिय रसमय दिव्य चरितामृत स्रोत मुझे इस श्रीवृन्दावन में ले आया है, उन महापुरुषों में भी शिरोमणि जो रसिक महापुरुष हैं उन राधा प्रिय जनों के चरण युगल में मैं आत्म-समर्पण करते हुए एवं यहाँ श्रीवृन्दावन में ही सुख सहित मैं अपनी समस्त आयु बिताऊंगा।

