कब देखौं भरि नैन - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (266)

कब देखौं भरि नैन - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (266)

कब देखौं भरि नैन, गौर स्याम दोऊ लाडिले।
श्री हरिदासी ऐंन, करत विहार अभंग जे॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (266)

जो गौर-श्याम दोऊ लाड़िले श्री स्वामी हरिदास जी महाराज की गोदी में अनादिकाल से विहार कर रहे हैं, उन्हें मैं आँखें भर-भर कर कब देख पाऊँगा?