श्रीमद् वृन्दावनने रत्नवल्लीवृक्षैश्चित्रज्योतिरानन्दपुष्पैः।
कीर्णे स्वर्णस्थल्युदञ्चत् कदम्बच्छायायां नश्चक्षुषी गौरनीले॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (2.38)
रत्नमय लता-वृक्षों से मण्डितविचित्र ज्योत्स्ना विस्तार करने वाले आनन्द मय पुष्पों से व्याप्त श्रीवृन्दावन में स्वर्ण-स्थली से शोभित कदम्ब की छाया में (विराजमान) गौर-नील वपुधारी श्री युगल किशोर ही हमारे नेत्रों में नित्य विराजमान रहें।
कीर्णे स्वर्णस्थल्युदञ्चत् कदम्बच्छायायां नश्चक्षुषी गौरनीले॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (2.38)
रत्नमय लता-वृक्षों से मण्डितविचित्र ज्योत्स्ना विस्तार करने वाले आनन्द मय पुष्पों से व्याप्त श्रीवृन्दावन में स्वर्ण-स्थली से शोभित कदम्ब की छाया में (विराजमान) गौर-नील वपुधारी श्री युगल किशोर ही हमारे नेत्रों में नित्य विराजमान रहें।

