व्यास विवेकी संत जन, कहनी रहनी में एक।
कहनि कहैं करनी करैं, ज्यौं पाथर की रेख॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (54)
विवेकी भक्त की कहनी और रहनी एक ही होती है; अर्थात् जो वे उपदेश देते हैं, वही स्वयं भी आचरण में लाते हैं। उनकी कहनी और करनी की यह समानता पत्थर की रेखा के समान अटल होती है—जो कहते हैं, उसे वे प्राण-पण से निभाते भी हैं।
कहनि कहैं करनी करैं, ज्यौं पाथर की रेख॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (54)
विवेकी भक्त की कहनी और रहनी एक ही होती है; अर्थात् जो वे उपदेश देते हैं, वही स्वयं भी आचरण में लाते हैं। उनकी कहनी और करनी की यह समानता पत्थर की रेखा के समान अटल होती है—जो कहते हैं, उसे वे प्राण-पण से निभाते भी हैं।

