(दोहा)
मुरली की माला करी, नन्द लाला बस हेत।
राधे राधे रटत नित, गूढ़ मंत्र संकेत॥
(पद)
जाको नाम शेष रटैं शिव आदि सुर रटैं,
मुनि-गन नर नारि रटत न हटहीं। [1]
देव ओ अदेव बधू नाग बधू नृप बधू,
रटत हैं नांव छांडि घट के कपटहीं॥ [2]
कमला कमल मुख अमल रटत नाम,
सेवा सावधान रहैं पायन निकटहीं। [3]
जाकौ सब रटैं सो नागर तट जमुनां कैं,
मुरली में राधे-राधे नाम नित्य रटहीं॥ [4]
- श्री नागरीदास जी (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, व्रज सार (16)
(दोहा)
श्री कृष्ण, प्रेम के वश मुरली में "राधे राधे" शब्द की धुन बजा रहे हैं, जिससे यह समस्त ब्रह्मांड मोहित हो रहा है, और इससे यह सिद्ध हो रहा है की राधा नाम अति गूढ़ एवं मन्त्र शिरोमणि है।
(पद)
जिनका नाम का (अर्थात श्री कृष्ण का) भगवान शिव, शेष और देवता गण भी नित्य रटन करते हैं, मुनि गण, ऋषि गण एवं समस्त नर नारी भी इसी श्री कृष्ण नाम का जाप करते हैं। [1]
देव पत्नियाँ, नाग पत्नियाँ, भूमण्डल की रानियाँ भी अपना कपट एवं सुंदरता का अभिमान त्याग कर श्री कृष्ण के नाम का नित्य जाप करती हैं। [2]
श्री लक्ष्मी जी के भी मुख कमल से नित्य श्री कृष्ण नाम का रटन हो रहा है एवं वह श्री कृष्ण के श्री चरणों में बड़ी सावधानी पूर्वक सेवा करती हैं। [3]
तीनो लोक जिसके नाम का नित्य रटन करते हैं, वह श्यामसुंदर श्री कृष्ण, श्री यमुना जी के तट पर अपनी मुरली से “राधे राधे” नाम का नित्य रटन करते हैं। [4]
मुरली की माला करी, नन्द लाला बस हेत।
राधे राधे रटत नित, गूढ़ मंत्र संकेत॥
(पद)
जाको नाम शेष रटैं शिव आदि सुर रटैं,
मुनि-गन नर नारि रटत न हटहीं। [1]
देव ओ अदेव बधू नाग बधू नृप बधू,
रटत हैं नांव छांडि घट के कपटहीं॥ [2]
कमला कमल मुख अमल रटत नाम,
सेवा सावधान रहैं पायन निकटहीं। [3]
जाकौ सब रटैं सो नागर तट जमुनां कैं,
मुरली में राधे-राधे नाम नित्य रटहीं॥ [4]
- श्री नागरीदास जी (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, व्रज सार (16)
(दोहा)
श्री कृष्ण, प्रेम के वश मुरली में "राधे राधे" शब्द की धुन बजा रहे हैं, जिससे यह समस्त ब्रह्मांड मोहित हो रहा है, और इससे यह सिद्ध हो रहा है की राधा नाम अति गूढ़ एवं मन्त्र शिरोमणि है।
(पद)
जिनका नाम का (अर्थात श्री कृष्ण का) भगवान शिव, शेष और देवता गण भी नित्य रटन करते हैं, मुनि गण, ऋषि गण एवं समस्त नर नारी भी इसी श्री कृष्ण नाम का जाप करते हैं। [1]
देव पत्नियाँ, नाग पत्नियाँ, भूमण्डल की रानियाँ भी अपना कपट एवं सुंदरता का अभिमान त्याग कर श्री कृष्ण के नाम का नित्य जाप करती हैं। [2]
श्री लक्ष्मी जी के भी मुख कमल से नित्य श्री कृष्ण नाम का रटन हो रहा है एवं वह श्री कृष्ण के श्री चरणों में बड़ी सावधानी पूर्वक सेवा करती हैं। [3]
तीनो लोक जिसके नाम का नित्य रटन करते हैं, वह श्यामसुंदर श्री कृष्ण, श्री यमुना जी के तट पर अपनी मुरली से “राधे राधे” नाम का नित्य रटन करते हैं। [4]

