(राग विभास)
प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी;
भेंटि नवीन मेघ सौं दामिनी॥ [1]
मोहन रसिक राइ री माई तासौं जु मान करै,
ऐसी कौन कामिनी। [2]
(जै श्री) हित हरिवंश श्रवन सुनत प्यारी राधिका,
रमन सौं मिली गज गामिनी॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (2)
(श्री हित अली ने कहा-) हे भामिनि । (तुम्हें) प्यारे (श्रीकृष्ण) ने बुलाया है। (देखो) आज (कैसी) सुन्दर रात्रि है ? अतः आप नवीन मेघ रूप (श्रीलालजी) से ऐसे भेंटिये (मिलिये) जैसे दामिनि । [1]
अरी माई ! मोहन लाल रसिक राज से मान करे भला ऐसी कौन कामिनी होगी? [2]
श्री हित हरिवंश चन्द्र कहते हैं कि (सखि के) उक्त शब्द सुनते ही गज गामिनि प्यारी राधिका अपने रमण (प्रियतम) से जा मिली। [3]
प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी;
भेंटि नवीन मेघ सौं दामिनी॥ [1]
मोहन रसिक राइ री माई तासौं जु मान करै,
ऐसी कौन कामिनी। [2]
(जै श्री) हित हरिवंश श्रवन सुनत प्यारी राधिका,
रमन सौं मिली गज गामिनी॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (2)
(श्री हित अली ने कहा-) हे भामिनि । (तुम्हें) प्यारे (श्रीकृष्ण) ने बुलाया है। (देखो) आज (कैसी) सुन्दर रात्रि है ? अतः आप नवीन मेघ रूप (श्रीलालजी) से ऐसे भेंटिये (मिलिये) जैसे दामिनि । [1]
अरी माई ! मोहन लाल रसिक राज से मान करे भला ऐसी कौन कामिनी होगी? [2]
श्री हित हरिवंश चन्द्र कहते हैं कि (सखि के) उक्त शब्द सुनते ही गज गामिनि प्यारी राधिका अपने रमण (प्रियतम) से जा मिली। [3]

