व्यास कनक अरु कामिनी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (107)

व्यास कनक अरु कामिनी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (107)

व्यास कनक अरु कामिनी, ये लाँबी तरवारि।
चले हुते हरि भजनकौं, बीचहि लीनैं मारि॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (107)

श्री हरिराम व्यास जी सचेत करते हुए कहते हैं कि कंचन (धन-संपत्ति) और कामिनी (स्त्री) ये दोनों अत्यंत पैनी और लंबी तलवार के समान हैं, जिन्होंने असंख्य साधकों को श्री हरि के भजन के मार्ग में ही मोहग्रस्त कर आध्यात्मिक रूप से नष्ट कर दिया है।