लडैती जू सुनिये बात हमारी - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (41)

लडैती जू सुनिये बात हमारी - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (41)

लडैती जू सुनिये बात हमारी।
जैसे दई केलि सुखरासी अपनी जानी सँभारि॥
तैसेई देहु देह सों भूलन यहै लेहु हिय धारी।
श्री कुंजबिहारिनि रसिक सिरोमनि ललित महा हितकारी॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (41)

अपनी प्राणप्यारी श्री लाड़िलीजू से प्रार्थना करते हुए श्री ललित किशोरी देव कह रहे हैं "हे जीवनधन, जैसी सुख राशि निज केली आपने मुझको अपना समझ अति अद्भुत कृपा करके प्रदान किया है, ऐसे ही आप मेरे इस देह के अभिमान को भी संपूर्ण प्रकार से मिटा दीजिए। हे यावतरसिकों की शिरोमणि श्री कुंजबिहारीनिजू, मेरी तो एकमात्र आप ही महाहित करनेवाली हो।"