राधा तेरे उर में हैं गोविंद राधे।
बन जा पतंग डोरी राधा को थमा दे॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6606)
बन जा पतंग डोरी राधा को थमा दे॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6606)
हे मन, श्री राधारानी तेरे हृदय में ही है, तू उनकी पतंग बन जा और डोरी श्री राधारानी को थमा दे, अर्थात श्री राधारानी के पूर्ण शरणागत हो जा।

