यन्नारदाजेश शुकैरगम्यं वृन्दावने वञ्जुल मञ्जुकुञ्जे।
तत्कृण्ण- चेतो हरणैक विज्ञमत्रास्ति किञ्चित्परमं रहस्यम् ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (238)
तत्कृण्ण- चेतो हरणैक विज्ञमत्रास्ति किञ्चित्परमं रहस्यम् ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (238)
यहीं श्री वृंदावन में मनोहर वेतस्-कुञ्ज में नारद, ब्रह्मा, शिव, और शुकदेव आदि के द्वारा भी सर्वथा अगम्य, श्री कृष्ण के चित्त का हरण करने में एकमात्र विज्ञ कोई परम रहस्य विद्यमान् है ।

