मुहरैं मेवा अनत के, मिथ्या भोग विलास।
वृंदावन के स्वपच की, जूँठनि खैयै व्यास॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (42)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— ‘अन्य स्थानों का दिया हुआ मिथ्या भोग-विलास त्याज्य है; परन्तु वृन्दावन के स्वपच की झूठन भी माँगकर खाना कल्याणकारी है।’
वृंदावन के स्वपच की, जूँठनि खैयै व्यास॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (42)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— ‘अन्य स्थानों का दिया हुआ मिथ्या भोग-विलास त्याज्य है; परन्तु वृन्दावन के स्वपच की झूठन भी माँगकर खाना कल्याणकारी है।’

