अपि सर्वधर्महीनः सर्वकुकर्मावलेश्च निर्माता - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.13)

अपि सर्वधर्महीनः सर्वकुकर्मावलेश्च निर्माता - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.13)

अपि सर्वधर्महीनः सर्वकुकर्मावलेश्च निर्माता।
राधेति सिद्धमन्त्रं द्व्यक्षरमुच्चार्य किं न सिध्येयम्?॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.13)

सर्व धर्महीन होकर भी, सब कुकर्म करते हुए भी, ‘‘राधा’’ इन दो अक्षरों का सिद्ध-मन्त्र उच्चारण करके क्या तू भजन की सिद्धि को प्राप्त नहीं कर सकता?