यह वृन्दावन यह समैं - श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (102)

यह वृन्दावन यह समैं - श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (102)

यह वृन्दावन यह समैं, यह दम्पति की प्रीति।
नागरिया कैं हिय बसो, निति विहार रस- रीति॥

- श्री नागरी दास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (102)

इस समय श्री वृन्दावन धाम में दिव्य दम्पति श्री राधा–कृष्ण की प्रीति अत्यन्त अद्भुत है। श्री नागरीदास जी कहते हैं कि उनके हृदय में यह नित्य-विहार की रस-रीति पूर्ण रूप से बस चुकी है।