(राग काफी)
मन चेतु नहीं पछितावैगो।
भजिलै रे श्रीनंदनँदनको, जो तोहि पार लगावैगो॥ [1]
झूठ साँच को ब्योहारन सों, कहँ लगि द्रव्य कमावैगो।
निशि बासर याही चिंता में, रो रोके मरि जावैगो॥ [2]
जिनके काज अनीति करत तू, काउ काम नहिं आवैगो।
जब यमदूत तोहि पकरेंगे, तब न कछू बस्यावैगो॥ [3]
नारायण तेरी-मेरी में, योंहीं उमरि गमावैगो।
अन्त समय ढिंग आय गयो अब, फिर कब हरिगुण गावैगो॥ [4]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (5)
अरे मन, अब तू जाग जा, नहीं तो तू बहुत पछतायगा। तुझे जिसको भजना चाहिए, उनको तूने भुलाया हुआ है । अत्यंत कृपालु श्री कृष्ण का नित्य भजन कर, केवल वही तुझे पार लगा सकते हैं । [1]
इस झूठे संसारी नातेदार, रिश्तेदारों के व्यवहार के चक्कर में फँसकर, दिन रात केवल पैसा ही कमाएगा क्या? इसी के लिए ही क्या मानव देह तुझे मिला है? दिन रात इसी (संसारी धन, संसारी आसक्ति) की चिंता में ही तू रो रो कर मर जाएगा। [2]
जिन सम्बन्धियों के कारण तू अनीति कर रहा है, वह रिश्तेदार तेरे कुछ काम नहीं आएँगे। जब यमराज के दूत तुझे पकड़ कर लेजाएँगे, तब तेरे बस में कुछ भी नहीं होगा। [3]
अरे मन, तेरी उमर तो “तेरा मेरा” करने में ही निकली जा रही है, तू कब भजन करेगा? श्री नारायण स्वामी कहते हैं: आँखे खोल कर देख तेरा अंत समय कभी भी आ सकता है और श्री हरि का गुणगान कर अपनी बिगड़ी बना ले। [4]
मन चेतु नहीं पछितावैगो।
भजिलै रे श्रीनंदनँदनको, जो तोहि पार लगावैगो॥ [1]
झूठ साँच को ब्योहारन सों, कहँ लगि द्रव्य कमावैगो।
निशि बासर याही चिंता में, रो रोके मरि जावैगो॥ [2]
जिनके काज अनीति करत तू, काउ काम नहिं आवैगो।
जब यमदूत तोहि पकरेंगे, तब न कछू बस्यावैगो॥ [3]
नारायण तेरी-मेरी में, योंहीं उमरि गमावैगो।
अन्त समय ढिंग आय गयो अब, फिर कब हरिगुण गावैगो॥ [4]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (5)
अरे मन, अब तू जाग जा, नहीं तो तू बहुत पछतायगा। तुझे जिसको भजना चाहिए, उनको तूने भुलाया हुआ है । अत्यंत कृपालु श्री कृष्ण का नित्य भजन कर, केवल वही तुझे पार लगा सकते हैं । [1]
इस झूठे संसारी नातेदार, रिश्तेदारों के व्यवहार के चक्कर में फँसकर, दिन रात केवल पैसा ही कमाएगा क्या? इसी के लिए ही क्या मानव देह तुझे मिला है? दिन रात इसी (संसारी धन, संसारी आसक्ति) की चिंता में ही तू रो रो कर मर जाएगा। [2]
जिन सम्बन्धियों के कारण तू अनीति कर रहा है, वह रिश्तेदार तेरे कुछ काम नहीं आएँगे। जब यमराज के दूत तुझे पकड़ कर लेजाएँगे, तब तेरे बस में कुछ भी नहीं होगा। [3]
अरे मन, तेरी उमर तो “तेरा मेरा” करने में ही निकली जा रही है, तू कब भजन करेगा? श्री नारायण स्वामी कहते हैं: आँखे खोल कर देख तेरा अंत समय कभी भी आ सकता है और श्री हरि का गुणगान कर अपनी बिगड़ी बना ले। [4]

