वृन्दावन श्रवनन सुनहि, वृन्दावन को गान।
मन वच कै अति हेत सौं, वृन्दावन उर आन॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (78)
हे मन! कानों से श्री वृन्दावन की महिमा सुन, जिह्वा से श्री वृन्दावन की महिमा का गान कर और प्रेमपूर्वक श्री वृन्दावन को अपने हृदय में धारण कर।
मन वच कै अति हेत सौं, वृन्दावन उर आन॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (78)
हे मन! कानों से श्री वृन्दावन की महिमा सुन, जिह्वा से श्री वृन्दावन की महिमा का गान कर और प्रेमपूर्वक श्री वृन्दावन को अपने हृदय में धारण कर।

