(राग कान्हरौ)
रुचि के प्रकास परस्पर खेलन लागे। [1]
राग रागिनी अलौकिक उपजत नृत्य संगीत अलग लाग लागे॥ [2]
राग ही में रंग रह्यौ रंग के समुद्र में दोऊ झागे। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
पै रंग रह्यौ रस ही में पागे॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (2)
निकुंजमहल श्याम श्यामा के बिहार से प्रकाशित है । पुष्पों की सेज पर दोनों एकान्त में विलस रहे हैं । प्रिया जी का मुख चन्द्र प्रफुल्लित है । ललिता सखी संगीत की तान छेड़ रही हैं, जिसे सुनकर प्रिया प्रियतम रास रंग में सराबोर होकर नृत्य करने लगते हैं ।
उनके वचन सखी से -हे सखी ! पिय प्यारी दोनों अपने अपने मनोरथ अनुसार रास खेल रहे हैं। [1]
राग रागिनी यानि प्रिया प्रियतम के स्नेह प्रेम अलौकिक है । नृत्य संगीत के रंग में बिहार के क्रम में चरण पकड़, हृदय स्पर्श आलिंगन अदभुत गति से जलन हो रहा है । भिन्न भिन्न अलग-अलग गति से नृत्य हो रहा है । [2]
दोनों कभी गलबाँही तो कभी संगीत और नृत्य के भेद अनुसार रास में मगन नृत्य कर रहे हैं । उनके अंगों के परस्पर स्पर्श से विभिन्न प्रकार के वाद्य यन्त्रों की बजने की ध्वनि हो रही है । अदभुत नृत्य के राग, स्नेह, प्रेम रूपी समुद्र में प्रफुल्लता से भीगे, डूबे हुए रस का पान कर रहे हैं । प्रियतम मदन मोहन रंग रस के समुद्र संग झूल रहे है । [3]
श्री हरिदासी के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी एवं नित्य विहारिणी के रास खेल में प्यारी जी की जीत हई । प्यारे उनकी जीत पर अति प्रसन्न हुए हैं । पुनः दोनों में आनन्द रस सराबोर हो भींज एक रूप हो गये। [4]
रुचि के प्रकास परस्पर खेलन लागे। [1]
राग रागिनी अलौकिक उपजत नृत्य संगीत अलग लाग लागे॥ [2]
राग ही में रंग रह्यौ रंग के समुद्र में दोऊ झागे। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
पै रंग रह्यौ रस ही में पागे॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (2)
निकुंजमहल श्याम श्यामा के बिहार से प्रकाशित है । पुष्पों की सेज पर दोनों एकान्त में विलस रहे हैं । प्रिया जी का मुख चन्द्र प्रफुल्लित है । ललिता सखी संगीत की तान छेड़ रही हैं, जिसे सुनकर प्रिया प्रियतम रास रंग में सराबोर होकर नृत्य करने लगते हैं ।
उनके वचन सखी से -हे सखी ! पिय प्यारी दोनों अपने अपने मनोरथ अनुसार रास खेल रहे हैं। [1]
राग रागिनी यानि प्रिया प्रियतम के स्नेह प्रेम अलौकिक है । नृत्य संगीत के रंग में बिहार के क्रम में चरण पकड़, हृदय स्पर्श आलिंगन अदभुत गति से जलन हो रहा है । भिन्न भिन्न अलग-अलग गति से नृत्य हो रहा है । [2]
दोनों कभी गलबाँही तो कभी संगीत और नृत्य के भेद अनुसार रास में मगन नृत्य कर रहे हैं । उनके अंगों के परस्पर स्पर्श से विभिन्न प्रकार के वाद्य यन्त्रों की बजने की ध्वनि हो रही है । अदभुत नृत्य के राग, स्नेह, प्रेम रूपी समुद्र में प्रफुल्लता से भीगे, डूबे हुए रस का पान कर रहे हैं । प्रियतम मदन मोहन रंग रस के समुद्र संग झूल रहे है । [3]
श्री हरिदासी के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी एवं नित्य विहारिणी के रास खेल में प्यारी जी की जीत हई । प्यारे उनकी जीत पर अति प्रसन्न हुए हैं । पुनः दोनों में आनन्द रस सराबोर हो भींज एक रूप हो गये। [4]

